कई बार ऐसा कुछ घट जाता जो लगता है गलत है,अन्याय है किन्तु कैसे कहें किससे कहे जबकि जानता हूँ इस कथित प्रजातंत्र में हजारो की आवाज में मेरे स्वर भी नगारकानें में तुती की तरह ही होंगे किन्तु चुप रहकर शायद मैं अन्याय करूँगा अपने साथ ! बेकस होकर सोना मंजूर नहीं पर खुल कर विरोध करने का दम भी नहीं, ऐसे में ब्लागिंग एक माध्यम है अपने आपको प्रकट करने का |समालोचना मिलनें पर लगेगा की मैं सही हूँ मेरी सोच की दिशा सही है और विरोधी प्रतिक्रिया मुझे अपने आपको सुधारने मौका देगी ही,. तो आपका स्वागत है !